Album: नात शरीफ़
Lyrics by: शकील आरफी
Performed by: शकील आरफी
आंगन मिला मचान मिली छत नहीं मिली
जब तक हमें हुजूर की निस्बत नहीं मिली।
आले नबी से फिर गए इज्ज़त नहीं मिली
जन्नत की आरज़ू मिली जन्नत नहीं मिली।
दुनिया के सब यजीद इसी गम में मर गए
सर मिल गया हुसैन का बैअ़त नहीं मिली।
आक़ा ने सदियों पहले कहा उनको बाबुल इ़ल्म
अब तक अली के घर में जहालत नहीं मिली।
गुम हो गए जो लोग किताबों की भीड़ में
उनको किसी फ़क़ीर की सोहबत नहीं मिली।
खाके दरे अली न मिलाते थे इसलिए
सुरमा फ़रोख्तों को बसीरत नहीं मिली।
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