Performed by: अब्दुल सत्तार नियाज़ी
तेरा मांगता न दर बदर जाए
तेरी देहलीज़ पे ही मर जाए।
मेरे वारिस मेरे गरीब नवाज़
मेरी झोली भी आज भर जाए।
आरज़ू है कि मेरी उम्र तमाम
यादे सरकार में गुज़र जाए।
फर्श तो फर्श है मेरे आक़ा
अर्श पर भी तेरी नज़र जाए।
जो भी महफ़िल में तेरी आया है
उसकी क़िस्मत भी फिर संवर जाए।
बांट देते हैं सब फ़क़ीरों में
जो भी नेअ़मत नबी के घर जाए।
सबकी किस्मत सवारने वाले
मेरी तक़दीर भी संवर जाए।
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