दुनिया के सब यजीद इसी गम में मर गए - Duniya Ke Sab Yazeed Isi Gam Mein Margaye ( Shakeel Arfi )


Album: नात शरीफ़
Lyrics by: शकील आरफी
Performed by: शकील आरफी

आंगन मिला मचान मिली छत नहीं मिली 
जब तक हमें हुजूर की निस्बत नहीं मिली।

आले नबी से फिर गए इज्ज़त नहीं मिली
जन्नत की आरज़ू मिली जन्नत नहीं मिली।

दुनिया के सब यजीद इसी गम में मर गए 
सर मिल गया हुसैन का बैअ़त नहीं मिली।

आक़ा ने सदियों पहले कहा उनको बाबुल इ़ल्म 
अब तक अली के घर में जहालत नहीं मिली।

गुम हो गए जो लोग किताबों की भीड़ में 
उनको किसी फ़क़ीर की सोहबत नहीं मिली।

खाके दरे अली न मिलाते थे इसलिए 
सुरमा फ़रोख्तों को बसीरत नहीं मिली।

या इलाही हर जगह तेरी अता का साथ हो - Ya Ilahi Har Jagah Teri Ata Ka Sath Ho (Owais Raza Qadri)


Album: दुआ ए पाक
Lyrics by: आला_हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ फाज़िले बरेलवी
Performed by: ओवैस रज़ा क़ादरी, बिलाल रज़ा क़ादरी, अह़मद रज़ा क़ादरी

या इलाही, हर जगह तेरी अ़ता का साथ हो
जब पडे मुश्किल शहे मुश्किल कुशा का साथ हो।

या इलाही, भूल जाऊं नज़अ़ की तकलीफ को
शादी ए दीदार ह़ुस्ने मुस्त़फ़ा का साथ हो।

या इलाही, ग़ौरे तीरह की जब आए सख़्त रात
उनके प्यारे मुंह की सुबह़े जां फिज़ा का साथ हो।

या इलाही, जब पड़े मह़शर मे शोरे_दारो_गीर
अम्न देने वाले प्यारे पेशवा का साथ हो।

या इलाही, जब ज़बाने बाहर आएँ प्यास से
साहिबे कौसर शहे जुदो अ़ता का साथ हो‌।

या इलाही, सर्द मेहरी पे हो जब ख़ुर्शीदे_ह़श्र
सय्यदे बे साया के ज़िल्ले_लिवा का साथ हो।

या इलाही, गर्मी ए महशर से जब भड़कें बदन
दामने मह़बूब की ठंडी ठंडी_हवा का साथ हो।

या इलाही, नामा_ए_आमाल जब खुलने लगें
ऐब पोशे ख़ल्क़ सत्तारे_ख़त़ा का साथ हो।

या इलाही, जब बहें आंखे ह़िसाबे_जुर्म में
उन तबस्सुम रेज़ होठों की दुआ का साथ हो।

या इलाही, जब हिसाबे ख़ंदा_ए_बेजा रुलाए
चश्म गिरियाने शफीए_मुर्तज़ा का साथ हो।

या इलाही, रंग लाएँ जब मेरी बेबाकीयाँ
उनकी नीची नीची नज़रों की ह़या का साथ हो।

या इलाही, जब चलूं तारीक राहे पुल_स़िरात
आफ़ताबे हाशमी नूरुल_हुदा का साथ हो।

या इलाही जब सरे_शमशीर पर चलना पड़े
रब्बी सल्लिम, कहने वाले ग़मज़दा का साथ हो।

या इलाही, जो दुआ_ए_नेक मैं तुझ से करूं
क़ुदसियों के लब से आमीन रब्बना का साथ हो।

या इलाही, जब रज़ा ख़्वाबे गिरां से सर उठाए
दौलते बेदार इश्क़े_मुस्त़फ़ा का साथ हो।

लाल के तेरे सहरा सजा है - Lal Ke Tere Sehra Saja Hai ( Zeeshan Bhargainvi )


Album: सहरा बंदी
Lyrics by: ज़ीशान भरगैनवी
Performed by: ज़ीशान भरगैनवी

देख ले ए मेरी मां तू आकर, लाल के तेरे सहरा सजा है
तेरे बिन लगता सूना समां है, लाल के तेरे सहरा सजा है।

सारे चहरे नज़र आ रहे हैं
आंखें चहरा तेरा ढूंढती है
तेरा चहरा कहां जा छुपा है, लाल के तेरे सहरा सजा है।

चाहती थी दुल्हन घर में आए
खुशियों से तेरा घर जगमगाए
तेरा अरमान पूरा हुआ है, लाल के तेरे सहरा सजा है।

इस मुबारक सुहानी घड़ी में
तू जो होती तो क्या बात होती
तेरी यादों से दिल गमजदा है, लाल के तेरे सहरा सजा है।

आके बेटे की ले लें बालाएं
दिल से दे जा इसे तू दुआएं
इंतज़ार में तेरे खड़ा है, लाल के तेरे सहरा सजा है।

प्यारे भाई नसीम अब तो आओ
मेरे भाई को गोदी उठाओ
ये तुम्हारी भी रह तक रहा है, लाल के तेरे सहरा सजा है।

मेरे मौला यह फरियाद सुनना
मेरे भाई को आबाद रखना
अर्ज़ जीशान यह कर रहा है, मेरे भाई के सहरा सजा है।

मेरे आका के इलावा कौन है - Mere Aaqa Ke Alawa Kaun Hai ( Ziya Yazdani )

तेरा मांगता ना दर बदर जाए - Tera Mangta Na Dar Badar Jaye ( Abdul Sattar Niazi )


Album: नात शरीफ़
Performed by: अब्दुल सत्तार नियाज़ी

तेरा मांगता न दर बदर जाए
तेरी देहलीज़ पे ही मर जाए।

मेरे वारिस मेरे गरीब नवाज़
मेरी झोली भी आज भर जाए।

आरज़ू है कि मेरी उम्र तमाम
यादे सरकार में गुज़र जाए।

फर्श तो फर्श है मेरे आक़ा
अर्श पर भी तेरी नज़र जाए।

जो भी महफ़िल में तेरी आया है
उसकी क़िस्मत भी फिर संवर जाए।

बांट देते हैं सब फ़क़ीरों में
जो भी नेअ़मत नबी के घर जाए।

सबकी किस्मत सवारने वाले
मेरी तक़दीर भी संवर जाए।

ज़मीं से आसमां और आसमां से लामकां पहुंचे - Zameen Se Aasman Aur Aasman Se La Makaan Pahunche ( Ahmad ul Fattah )


Album: नात शरीफ़
Performed by: अहमदुल फत्ताह

ज़मीं से आसमां और आसमां से लामकां पहुंचे
जहां कोई नहीं पहुंचा मेरे आका वहां पहुंचे।

खड़े थे मस्जिदे अक़्सा में सारे अंबिया सफ में
इमामत के लिए जिस दम इमामुल अंबिया पहुंचे।

बहुत हैरां थे जिब्रीले अमीं रफ्तार जब देखी
अभी आका यहां पर थे खुदा जाने कहां पहुंचे।

ना पहुंचा है न पहुंचेगा वहां तक कोई रुत्वे में
रसूले मोहतरम कौनेन के वाली जहां पहुंचे।